إلى آنّا آخماتوفا - بوريس باسترناك | اﻟﻘﺼﻴﺪﺓ.ﻛﻮﻡ

شاعر روسي حاصل على جائزة نوبل للآداب عام 1958 (1890-1960)


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يبدو لي ، أنني سأنتقي كلمات ،
تشبه تكوينك ِ الأول .
لا فرق عندي - إن أخطأت ،
فأنا لن أتخلص من عادتي أن اخطأ .

إني اسمع أصوات السطوح المبلولة ،
والضربات المنتقاة للنقش على الخشب .
ومدينة ما ، معروفة من الأحرف الأولى ،
تنمو و تتردد في كل مقطع .

الربيع من حولنا ، لكن
الخروج من المدينة ممنوع .
لا زالت الزبونة البخيلة قاسية.
العينان تدمعان من التطرّيز على ضوء القنديل ،
ينهض الفجر ، و لا يستقيم الظهر .
تتنفس رحابات لادوج الملساء
تسرع إلى الماء ، مستسلمة لوهن قوتها .
لا فائدة من تلك المشاوير .
فالقنوات تفوح برائحة فاسدة من المجارير .
فيها يغطس ، كما الجوز الفارغ ،
الهواء الساخن وهو يهزّ أجفان
الأغصان ، و النجوم ، و المصابيح ، والعصور ،
وخياطة البياضات وهي تنظر
في البعيد من فوق الجسر .

قد تكون للنظرة حدة مختلفة .
قد يختلف وضوح الصورة .
لكن الذي يحلّ أقسى القلاع –
رحابٌ ليليٌّ تحت نظر ليلةٍ بيضاء .

هكذا أتخيل نظرتك و خيالك .
هو بالنسبة لي مهيبٌ
ليس بسبب عمود الملح ذاك ،
الذي به أنتِ منذ خمس سنوات
قتلتِ الخوفَ من الهرب إلى القافية .

لكن ، انطلاقاً ، من كتبكِ الأولى ،
حيث نَمَتْ حبات النثر الثاقب ،
هو في كل شيء ، كما الشرارة الدليل ،
يُجبر على محاربة ما كان من أحداث .
*****







(ﺟﻤﻴﻊ ﺗﺮﺟﻤﺎﺕ إبراهيم استنبولي)
اﻟﺘﻌﻠﻴﻘﺎﺕ (0)   
Анне Ахматовой


Мне кажется, я подберу слова,
Похожие на вашу первозданность.
А ошибусь, - мне это трын-трава,
Я все равно с ошибкой не расстанусь.

Я слышу мокрых кровель говорок,
Торцовых плит заглохшие эклоги.
Какой-то город, явный с первых строк,
Растет и отдается в каждом слоге.

Кругом весна, но за город нельзя.
Еще строга заказчица скупая.
Глаза шитьем за лампою слезя,
Горит заря, спины не разгибая.

Вдыхая дали ладожскую гладь,
Спешит к воде, смиряя сил упадок.
С таких гулянок ничего не взять.
Каналы пахнут затхлостью укладок.

По ним ныряет, как пустой орех,
Горячий ветер и колышет веки
Ветвей, и звезд, и фонарей, и вех,
И с моста вдаль глядящей белошвейки.

Бывает глаз по-разному остер,
По-разному бывает образ точен.
Но самой страшной крепости раствор -
Ночная даль под взглядом белой ночи.

Таким я вижу облик ваш и взгляд.
Он мне внушен не тем столбом из соли,
Которым вы пять лет тому назад
Испуг оглядки к рифме прикололи,

Но, исходив от ваших первых книг,
Где крепли прозы пристальной крупицы,
Он и во всех, как искры проводник,
Событья былью заставляет биться.

Борис Пастернак: Анне Ахматовой.
& Антология русский поэзии.




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